15 जुलाई 2026 | ऋषिकेश, देहरादून (उत्तराखंड)
उत्तराखंड के ऋषिकेश–भानियावाला रोड चौड़ीकरण परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। सड़क को फोर-लेन बनाने की योजना के तहत लगभग 3,000 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। इस फैसले के खिलाफ पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों, छात्रों और कई सामाजिक संगठनों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने पेड़ों से चिपककर उन्हें बचाने की कोशिश की। इस वजह से पूरे आंदोलन की तुलना उत्तराखंड के ऐतिहासिक चिपको आंदोलन से की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण और जंगलों की कीमत पर नहीं।
जिस इलाके में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, वह राजाजी नेशनल पार्क के Elephant Corridor के करीब माना जाता है। यह कॉरिडोर हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में पेड़ कटने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही क्षेत्र की जैव विविधता, भूजल और स्थानीय जलवायु पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे। कई प्रदर्शनकारी पेड़ों से लिपट गए और कटाई रोकने की मांग करने लगे। मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम भी मौजूद रही। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि सड़क निर्माण के लिए ऐसा विकल्प चुना जाए जिससे कम से कम पेड़ों की कटाई हो और Elephant Corridor सुरक्षित रहे।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से ऋषिकेश और देहरादून के बीच ट्रैफिक जाम कम होगा, यात्रा सुरक्षित होगी और पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों को भी सुविधा मिलेगी।
अधिकारियों का यह भी कहना है
कि पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक नियमों का पालन किया जाएगा और जहां संभव होगा वहां Compensatory Plantation (प्रतिपूरक वृक्षारोपण) किया जाएगा।
यह मामला अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड की सबसे बड़ी पर्यावरणीय बहसों में शामिल हो सकता है।
15 जुलाई 2026 को ऋषिकेश–भानियावाला रोड परियोजना को लेकर हुआ विरोध उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती को फिर सामने लेकर आया है। अब सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर है कि सड़क परियोजना और पर्यावरण संरक्षण के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है.