बेहट। सहारनपुर के बेहट क्षेत्र की आम फल पट्टी एक बार फिर चर्चा में है। आम की फसल टूटने के बाद खाली खड़े बागों में मौजूद हरे-भरे और पुराने आम के पेड़ों को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। आरोप है कि कुछ बागों में लकड़ी ठेकेदारों की नजर मोटे फलदार आम के पेड़ों पर है और इन पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है।
बेहट तहसील में आम की बागवानी का विशेष महत्व है। NABARD की सहारनपुर जिला रिपोर्ट के अनुसार, बेहट तहसील के 30 गांवों को आम को बढ़ावा देने के लिए फल पट्टी के रूप में विकसित किया गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आम की फसल खत्म होने के बाद कुछ बागों में मोटे और पुराने आम के पेड़ अब लकड़ी ठेकेदारों के निशाने पर बताए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और कार्रवाई नहीं हुई तो इन पेड़ों की कटाई हो सकती है।
स्थानीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों और लकड़ी ठेकेदारों की मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
बेहट क्षेत्र की पहचान आम के बागों से जुड़ी हुई है। ऐसे में बड़े और फलदार पेड़ों की कटाई से केवल पर्यावरण को ही नुकसान नहीं, बल्कि क्षेत्र की बागवानी और किसानों की आय पर भी असर पड़ने की आशंका है।
सहारनपुर की आम से जुड़ी पहचान हाल के वर्षों में भी लगातार सामने आती रही है। जिले में आम की अलग-अलग और विशेष किस्मों को लेकर देशभर में चर्चा होती रही है।
बेहट क्षेत्र में प्रतिबंधित आम की लकड़ी को लेकर पहले भी वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई सामने आ चुकी है। अगस्त 2025 में Live Hindustan की रिपोर्ट के मुताबिक, फल पट्टी क्षेत्र में आम के पेड़ काटकर लकड़ी ले जा रहे एक वाहन को वन विभाग और पुलिस टीम ने पकड़ा था। रिपोर्ट में एक ठेकेदार के पकड़े जाने और वाहन को कब्जे में लेने की जानकारी दी गई थी।
ऐसे में वर्तमान में हरे-भरे आम के पेड़ों की कटाई की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता को गंभीरता से देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बेहट क्षेत्र के ऐसे बागों की निगरानी की जाए, जहां हरे-भरे आम के पेड़ों की कटाई की आशंका है। साथ ही नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि वन विभाग और संबंधित प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। यदि विभाग की ओर से मौके पर जांच कराई जाती है तो हरे आम के पेड़ों की कटाई से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
फिलहाल मामले में विभागीय जांच और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार है।
Disclaimer: इस रिपोर्ट में स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी का उल्लेख किया गया है। संबंधित अधिकारियों या अन्य पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट सोमपाल कश्यप | बेहट
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