लाखामंडल, चकराता, देहरादून (उत्तराखंड)। चकराता वन प्रभाग के लाखामंडल क्षेत्र के गाता खड्ड में 40 लकड़ी की सिल्लियां पकड़े जाने के बाद मामला चर्चा में है। इस मामले को लेकर प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा की विशेष आमंत्रित कार्यकारिणी सदस्य बचना शर्मा ने वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय रेंजर विनोद चौहान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले में कथित मिलीभगत और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बचना शर्मा ने अपने वीडियो बयान में कहा कि जब 40 लकड़ी की सिल्लियां मौके पर पहुंच गईं, तो वन विभाग को जंगल में पेड़ों की कटाई से लेकर लकड़ी को सड़क तक लाने की प्रक्रिया के दौरान इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जंगल में पेड़ों की कटाई हुई, फिर लकड़ी की सिल्लियां तैयार की गईं और उन्हें खेतों के रास्ते सड़क तक लाया गया, तो इस दौरान संबंधित विभाग की निगरानी कहां थी।
भाजपा नेत्री ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी गरीब ग्रामीणों से पैसे लेकर जंगलों में अवैध गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
बचना शर्मा ने स्थानीय रेंजर विनोद चौहान पर आरोप लगाते हुए कहा कि गरीब ग्रामीणों के घरों में जाकर पुरानी लकड़ी उठाने की कार्रवाई की जाती है, जबकि उनके अनुसार, हाल में पकड़ी गई 40 लकड़ी की सिल्लियों के मामले में विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रामीणों के पुराने मकानों में लंबे समय से लकड़ी रखी होती है। ऐसे में पुरानी लकड़ी को लेकर कार्रवाई करने वाले विभाग को कथित रूप से हाल में काटी गई लकड़ी के मामले में भी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
बचना शर्मा ने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनके संज्ञान में लकड़ी के संबंध में 50 हजार रुपये लिए जाने की बात आई है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले का जल्द खुलासा करेंगी। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा नेत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में कई ग्रामीण पारंपरिक लकड़ी के मकानों में रहते हैं। उनके अनुसार, पुराने मकानों में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है, जबकि आधुनिक निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कुछ मकानों की उम्र अपेक्षाकृत कम हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुरानी लकड़ी के नाम पर गरीब ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने वन विभाग से मांग की कि ग्रामीणों के साथ होने वाली कार्रवाई और जंगलों में कथित अवैध कटान के मामलों में समान रूप से नियमों का पालन किया जाए।
बचना शर्मा ने प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल और संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने प्रमुख रूप से तीन मांगें रखीं:
उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर वन मंत्री और उच्च अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखेंगी।
लाखामंडल क्षेत्र में लकड़ी की सिल्लियां मिलने के मामले ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, भाजपा नेत्री की ओर से लगाए गए भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित वन अधिकारियों का पक्ष और जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट: भगवत मेहरा
नोट: यह समाचार भाजपा नेत्री बचना शर्मा के वीडियो बयान और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।