उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur) से एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक खबर सामने आई है, जहां प्रधान संगठन ने पंचायत कार्यकाल (Panchayat Term) बढ़ाने की जोरदार मांग उठाई है।
ग्राम प्रधानों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री (CM) के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और मौजूदा हालात में पंचायत चुनाव कराना मुश्किल बताया।
सहारनपुर जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने प्रधान संगठन के साथ मिलकर पंचायत चुनाव को लेकर अपनी चिंता जताई।
ज्ञापन में साफ कहा गया कि:
• वर्तमान स्थिति में चुनाव कराना practically possible नहीं है
• मतदाता सूची (Voter List) अभी पूरी तरह तैयार नहीं है
• कई कानूनी प्रक्रियाएं अभी अधूरी हैं
• उनका कहना है कि बिना तैयारी के चुनाव कराना “अव्यावहारिक और असंवैधानिक (Unconstitutional)” होगा।
प्रधान संगठन ने अपने ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण points रखे:
📍 Voter List Revision अभी अधूरी है
📍 Legal Process पूरी नहीं हुई है
📍 जल्दबाजी में चुनाव कराने से गलतियां हो सकती हैं
📍 इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया (Democratic Process) प्रभावित होगी
उन्होंने कहा कि अगर ऐसे में चुनाव होते हैं तो transparency और fairness दोनों पर सवाल उठेंगे।
प्रधानों ने इस बात का भी विरोध किया कि अगर चुनाव समय पर नहीं होते, तो प्रशासन द्वारा प्रशासक (Administrators) नियुक्त किए जाते हैं।
उनका कहना है:
प्रशासक जनता के प्रति सीधे जवाबदेह नहीं होते
पहले भी प्रशासकों के कामकाज पर सवाल उठ चुके हैं
इससे लोकतांत्रिक मूल्यों (Democratic Values) को नुकसान होता है
ग्राम प्रधानों ने खुद को जनता के प्रति ज्यादा जिम्मेदार और संवेदनशील बताया।
उनका कहना है कि:
👉 elected प्रधान ground level पर बेहतर काम करते हैं
👉 जनता से direct connection होता है
👉 accountability ज्यादा होती है
प्रधान संगठन ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए दूसरे राज्यों के उदाहरण भी दिए, जहां विशेष परिस्थितियों में पंचायत कार्यकाल बढ़ाया गया था।
इससे उन्होंने सरकार से मांग की कि:
➡️ similar situation में UP में भी यही फैसला लिया जाए
हालांकि, सभी प्रधान इस मांग से सहमत नहीं हैं।
कुछ प्रधानों ने नाराजगी जताई और कहा कि:
पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराने का फैसला गलत है
इससे ग्रामीण राजनीति प्रभावित होगी
प्रधान संगठन की मुख्य मांग साफ है:
✔ पंचायत कार्यकाल को बढ़ाया जाए
✔ जल्दबाजी में चुनाव न कराए जाएं
✔ ग्रामीण प्रशासन को स्थिर रखा जाए
सहारनपुर में उठी यह मांग अब एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है।
अगर सरकार इस पर निर्णय लेती है, तो इसका असर पूरे उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पंचायत सिस्टम पर पड़ सकता है।
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस मांग को मानती है या समय पर चुनाव कराने पर ही जोर देती है।