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सहारनपुर दारुल उलूम विवाद: हिंदू रक्षा दल ने शिव मंदिर होने का दावा किया | Saharanpur Darul Uloom Shiv Temple Claim Protest 2026

सहारनपुर के देवबंद में Darul Uloom Deoband को लेकर नया विवाद सामने आया। हिंदू रक्षा दल ने दारुल उलूम परिसर के नीचे शिव मंदिर होने का दावा करते हुए वैज

सहारनपुर में दारुल उलूम परिसर के नीचे शिव मंदिर होने का दावा, हिंदू रक्षा दल ने वैज्ञानिक जांच और खुदाई की उठाई मांग

देवबंद में नए विवाद की एंट्री, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित Darul Uloom Deoband एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस बार मामला धार्मिक दावे और राजनीतिक बयानबाजी से जुड़ा हुआ है। हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि दारुल उलूम परिसर की मस्जिद के नीचे प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है। संगठन ने प्रशासन से वैज्ञानिक जांच और खुदाई कराने की मांग की है।

गुरुवार को सहारनपुर में हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि अगर पूरे परिसर की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए तो वहां मंदिर और शिवलिंग के अवशेष मिल सकते हैं।

यह मामला सामने आने के बाद देवबंद और सहारनपुर में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

Darul Uloom Deoband देश के सबसे बड़े और प्रमुख इस्लामिक शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। इसकी स्थापना 30 सितंबर 1866 में हुई थी। देवबंद स्थित यह संस्थान लंबे समय से धार्मिक शिक्षा और फतवों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।

अब इसी संस्थान को लेकर हिंदू रक्षा दल ने बड़ा दावा किया है। संगठन के उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष Lalit Sharma ने कहा कि उन्हें स्थानीय लोगों और अन्य स्रोतों से जानकारी मिली है कि दारुल उलूम की मस्जिद के नीचे लगभग 14 फीट गहराई में प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है।

उन्होंने दावा किया कि वहां शिवलिंग और मंदिर के कई अवशेष दबे हुए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को तुरंत पूरे परिसर की वैज्ञानिक जांच करानी चाहिए।


“अगर मंदिर नहीं मिला तो मुझे फांसी दे देना” – ललित शर्मा

प्रदर्शन के दौरान ललित शर्मा ने बेहद बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर खुदाई में मंदिर नहीं मिलता तो उन्हें फांसी दे दी जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

उन्होंने कहा:


> “दारुल उलूम की मस्जिद के नीचे हमारे भगवान शिव को कैद किया गया है। प्रशासन वैज्ञानिक जांच कराए। अगर मंदिर नहीं मिलता तो मुझे फांसी दे दी जाए।”

उनके इस बयान के बाद मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की।

प्रशासन से क्या मांग की गई?

हिंदू रक्षा दल की ओर से प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में कई मांगें रखी गईं। संगठन ने कहा कि:

• पूरे परिसर की वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए

• जरूरत पड़ने पर खुदाई की जाए

• अगर मंदिर के अवशेष मिलते हैं तो उन्हें संरक्षित किया जाए

• मामले में कानूनी कार्रवाई की जाए

• हिंदू धार्मिक प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए

संगठन ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन कार्रवाई नहीं करता तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

PIL दाखिल करने की तैयारी

ललित शर्मा ने कहा कि अगर जांच में मंदिर के प्रमाण मिलते हैं तो इस मामले में जनहित याचिका यानी PIL दाखिल की जाएगी। उन्होंने कहा कि अदालत में जाकर मंदिर को “मुक्त कराने” की मांग की जाएगी।

उनका कहना है कि यह केवल धार्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मामला भी है। हालांकि अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या प्रशासनिक जांच में इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है।

सांसद इकरा हसन और सपा पर भी लगाए आरोप

प्रदर्शन के दौरान ललित शर्मा ने Iqra Hasan और Samajwadi Party पर भी निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता समाज में जातीय और सामाजिक तनाव पैदा कर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अलग-अलग समुदायों को आपस में लड़ाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।

ललित शर्मा ने कहा कि हाल ही में एक अन्य मामले में इकरा हसन केवल राजनीति करने के उद्देश्य से पहुंची थीं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया।

हालांकि इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

दारुल उलूम परिसर के नीचे शिव मंदिर होने के दावे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग हिंदू रक्षा दल की मांग का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग इस दावे को बिना सबूत का बता रहे हैं।

एक वर्ग का कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल को लेकर फैसला केवल वैज्ञानिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि अगर ऐतिहासिक तथ्य सामने आते हैं तो सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए।

प्रशासन की ओर से क्या कहा गया?

फिलहाल सहारनपुर प्रशासन की ओर से खुदाई या वैज्ञानिक जांच को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। प्रशासन ने केवल ज्ञापन मिलने की पुष्टि की है।

सूत्रों के अनुसार प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।

पहले भी उठ चुके हैं ऐसे दावे

देश में इससे पहले भी कई धार्मिक स्थलों को लेकर मंदिर और मस्जिद से जुड़े दावे सामने आते रहे हैं। कई मामलों में अदालतों ने सर्वे और जांच के आदेश दिए, जबकि कई मामलों में दावों को खारिज भी किया गया।

अब देवबंद का यह मामला भी धीरे-धीरे राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

निष्कर्ष

सहारनपुर और देवबंद से जुड़ा यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा चर्चा में रह सकता है। हिंदू रक्षा दल ने दारुल उलूम परिसर के नीचे शिव मंदिर होने का दावा करते हुए वैज्ञानिक जांच और खुदाई की मांग की है। हालांकि अभी तक इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासन, अदालत और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दावों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल मामला राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है।

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