सहारनपुर, 5 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन ने बुलडोजर की मदद से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब मस्जिद से जुड़े भूमि विवाद में जिला अदालत से भी मस्जिद पक्ष को राहत नहीं मिली थी। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित इस मस्जिद को लेकर लंबे समय से जमीन और निर्माण की वैधता का विवाद चल रहा था। जुलाई 2026 में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने संबंधित जमीन को सरकारी भूमि मानते हुए मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। साथ ही करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश भी सामने आया था।
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मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी। सितंबर की शुरुआत में जिला जज की अदालत ने अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने विवादित जमीन को सरकारी भूमि माना।
जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद शनिवार, 5 सितंबर 2026, को प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रवेश मार्गों को नियंत्रित किया गया ताकि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की गई है और इसका उद्देश्य सरकारी भूमि से कथित अनधिकृत कब्जा हटाना है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की ओर से 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल पेश किए जाने की बात सामने आई थी। मस्जिद पक्ष ने इसे पुराने निर्माण के समर्थन में महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया था।
वहीं सरकारी पक्ष ने इस दस्तावेज पर सवाल उठाए। अदालत में यह दलील दी गई कि 1 जनवरी 1911 रविवार था और सरकारी पक्ष ने सहारनपुर में बिजली व्यवस्था शुरू होने के समय को लेकर भी अलग तथ्य रखे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सरकारी पक्ष ने सहारनपुर में बिजली पहुंचने का समय 1922 और वितरण शुरू होने का समय 1928 बताया।
जुलाई में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश में करीब 6 करोड़ 41 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का उल्लेख किया गया था। यह राशि सरकारी भूमि के कथित अनधिकृत उपयोग और कब्जे से संबंधित देयता के रूप में निर्धारित की गई थी। जिला अदालत ने बाद में मूल आदेश को बरकरार रखा।
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्रवाई वाली जगह पर जाने से रोकने के लिए नजरबंद किया गया। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
दूसरी ओर प्रशासन का रुख है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है।
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर कार्रवाई को देखते हुए सहारनपुर में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए पुलिस बल की तैनाती की और लोगों से शांति बनाए रखने तथा अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की।
फिलहाल 5 सितंबर 2026 को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद का ध्वस्तीकरण इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा घटनाक्रम है। आगे मस्जिद पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय में कानूनी चुनौती दी जाती है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।
रिपोर्ट: भगवत मेहरा